SPOKEN HINDI MADE EASY - 49 ELOCUTION - BHARAT MEIN SWATANTRATA SANGRAM


भारत में स्वतंत्रता संग्राम (Bharat Mein Swatantrata Sangram)

माननीय प्रधानाचार्य महोदय, आदरणीय शिक्षकगण, और मेरे प्रिय साथियों, आप सभी को मेरा सादर नमस्कार।

आज मैं यहाँ “भारत में स्वतंत्रता संग्राम” विषय पर अपने विचार प्रस्तुत करने के लिए खड़ा हूँ।

भारत का स्वतंत्रता संग्राम केवल एक राजनीतिक आंदोलन नहीं था, बल्कि यह एक ऐसा महासंग्राम था जिसमें हर वर्ग, हर धर्म, हर भाषा और हर उम्र के लोग शामिल हुए। यह हमारी आत्मा की पुकार थी—गुलामी की बेड़ियों को तोड़कर स्वतंत्रता का सूरज देखने की लालसा।

अंग्रेज़ों की गुलामी ने हमें आर्थिक रूप से दरिद्र, सामाजिक रूप से विभाजित और मानसिक रूप से दबा दिया था। हमारे संसाधनों का दोहन किया गया, हमारी संस्कृति को कमजोर करने की कोशिश की गई, और हमारी आवाज़ को कुचल दिया गया। लेकिन इतिहास गवाह है—जब-जब भारतवासियों ने अन्याय के खिलाफ आवाज़ उठाई, तो वह आवाज़ एक जन-आंदोलन बन गई।

स्वतंत्रता संग्राम के प्रमुख चरण 1857 का विद्रोह, जिसे ‘स्वाधीनता का प्रथम संग्राम’ कहा जाता है, इस यात्रा का पहला बड़ा कदम था। मंगल पांडे की वीरता, रानी लक्ष्मीबाई का अदम्य साहस, तांत्या टोपे और बेगम हज़रत महल की कुर्बानियाँ आज भी हमें प्रेरित करती हैं।

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इसके बाद अंग्रेज़ों के खिलाफ असहयोग आंदोलन (1920), सविनय अवज्ञा आंदोलन (1930), और 1942 का भारत छोड़ो आंदोलन ने पूरे देश में आज़ादी की आग भड़का दी। महात्मा गांधी ने सत्य और अहिंसा के मार्ग से दुनिया को दिखा दिया कि बिना हिंसा के भी एक साम्राज्य को झुकाया जा सकता है।

क्रांतिकारी संघर्ष जहाँ गांधीजी शांति और अहिंसा के प्रतीक थे, वहीं भगत सिंह, चंद्रशेखर आज़ाद, रामप्रसाद बिस्मिल और नेताजी सुभाष चंद्र बोस जैसे क्रांतिकारियों ने हथियारों के बल पर अंग्रेज़ों को चुनौती दी। उनका साहस और बलिदान हमारे स्वतंत्रता संग्राम के सुनहरे अध्याय हैं।

महिलाओं का योगदान हमारे स्वतंत्रता संग्राम में महिलाओं का योगदान भी उतना ही महत्वपूर्ण रहा। सरोजिनी नायडू, कस्तूरबा गांधी, अरुणा आसफ़ अली, और दुर्गावती देवी जैसी वीरांगनाओं ने समाज की रूढ़ियों को तोड़कर आज़ादी की लड़ाई में भाग लिया।

स्वतंत्रता का अमूल्य उपहार 15 अगस्त 1947 को जब तिरंगा लहराया, तो यह केवल एक झंडा नहीं था—यह उन लाखों बलिदानों की पहचान था, जिन्होंने अपना खून, पसीना और जीवन देश के लिए अर्पित कर दिया। लेकिन याद रखिए, स्वतंत्रता केवल एक बार पाई गई वस्तु नहीं है; इसे बनाए रखना हमारी पीढ़ी का कर्तव्य है।

हमारा संकल्प आज, जब हम स्वतंत्र भारत में साँस ले रहे हैं, हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि यह आज़ादी कितनी कठिनाई से मिली है। हमें अपने देश की एकता, अखंडता और प्रगति के लिए मिलकर काम करना होगा, भ्रष्टाचार, भेदभाव और हिंसा से लड़ना होगा, और शिक्षा, विज्ञान, और सेवा के माध्यम से देश को आगे बढ़ाना होगा।

आइए, हम सभी संकल्प लें— "हम अपने राष्ट्र के सम्मान, स्वतंत्रता और विकास के लिए सदैव समर्पित रहेंगे, और भारत को विश्व में सबसे अग्रणी बनाने के लिए पूरी निष्ठा से कार्य करेंगे।"

धन्यवाद।


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