GURU KA MAHATV - PRACHIN PARAMPARA SE AADHUNIK SAMAJ TAK
गुरु का महत्व – प्राचीन परंपरा से आधुनिक समाज तक गुरु का महत्व: जीवन को अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाने वाला मार्गदर्शक "गुरु ब्रह्मा, गुरु विष्णु, गुरु देवो महेश्वरः। गुरुः साक्षात् परब्रह्म तस्मै श्री गुरवे नमः॥" भारतीय संस्कृति में गुरु का स्थान भगवान से भी ऊँचा माना गया है। गुरु केवल पढ़ाने वाला शिक्षक नहीं होता, बल्कि वह व्यक्ति होता है जो हमारे जीवन से अज्ञान का अंधकार दूर करके ज्ञान का प्रकाश फैलाता है। "गु" का अर्थ है अंधकार और "रु" का अर्थ है उसे दूर करने वाला। इसलिए गुरु वह है जो हमें सही मार्ग दिखाता है। आज के आधुनिक युग में भले ही शिक्षा के साधन बदल गए हों, लेकिन गुरु का महत्व आज भी उतना ही है जितना हजारों वर्ष पहले था। प्राचीन भारत में गुरु का स्थान भारत की प्राचीन गुरुकुल परंपरा विश्व की सबसे महान शिक्षा प्रणालियों में से एक थी। विद्यार्थी वर्षों तक अपने गुरु के आश्रम में रहकर केवल शिक्षा ही नहीं, बल्कि जीवन जीने की कला भी सीखते थे। भगवान श्रीराम ने महर्षि वशिष्ठ और विश्वामित्र से शिक्षा प्राप्त की। भगवान श्रीकृष्ण ने गुरु संदीपनि के आश्रम म...